आरबीआई ने संभाला मोर्चा

कोरोना वायरस के कारण सभी चीजों पर काफी फर्क पड़ रहा है. ऐसे में रिजर्व बैंक ने अर्थव्यवस्था में नकदी की तंगी दूर करने और कर्ज सस्ता करने के लिए रेपो रेट और बैंकों आरक्षित नकदी अनुपात यानि CRR में बड़ी कटौती की है. खबरों की मानें तो केंद्रीय बैंक ने कहा है कि सीआरआर में कटौती और नकद धन का प्रवाह बढ़ाने के कुछ अन्य उपायों से बैंकिंग जगत में 3.74 लाख करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध होगी.

लिए बड़े फैसले

इसके साथ ही आरबीआई ने लोगों को आश्वस्त किया है कि देश कि बैंक व्यवस्था मजबूत है, उनका निजी बैंकों में जमा धन पूरी तरह सुरक्षित है और लोगों को घबराकर पैसा निकालना नहीं चाहिए. रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन चली द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद इन उपायों की घोषणा की हैं. यह बैठक 24, 26 और 27 मार्च को हुई थी.  

अप्रैल में होनी थी बैठक

हालांकि खबर है कि बैठक अप्रैल की शुरुआत में होनी थी. केंद्रीय बैंक ने देश व्यापी बंदी के चलते कर्ज की किस्त चुकाने में दिक्कतों को देखते हुए बैंकों को सावधिक कर्ज की वसूली में तीन माह टालने की सहूलियत दी है. इसके साथ कार्यशील पूंजी पर ब्याज भुगतान पर भी 3 महीने के लिए रोक लगाने की अनुमति दी गई है. इससे एक दिन पहले ही वित्त मंत्रालय ने 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की जिसमें अगले तीन महीने तक गरीबों को राशन में पांच किलो गेहूं या चावल और एक किलो कोई भी दाल मुफ्त देने की घोषणा की गई है.  

वही खबर है कि जनधन खाता धारक महिलाओं को उनके खाते में तीन महीने में 1,500 रुपये नकद और जिन परिवारों को निशुल्क रसोई गैस दी गई उन्हें तीन महीने एलपीजी सिलेंडर मुफ्त देने का वादा किया गया है. आरबीआई ने रेपो दर को 0.75 प्रतिशत घटाकर 4.4 प्रतिशत कर दिया वहीं रिवर्स रेपो दर में 0.90 प्रतिश्त की कमी कर इसे 4 प्रतिशत पर ला दिया है. आपको बता दें कि रेपो दर वह दर होती है जिसपर केन्द्रीय बैंक अल्पावधि के लिए बैंकों को नकदी उपलब्ध कराता है, वहीं रिवर्स रेपो दर के जरिये नकदी को सोखता है. ऐसी रोचक जानकारी के लिए पढ़ें हमारे लेटेस्ट आर्टिकल. अधिक जानकारी के लिए विजिट करें हमारा फेसबुक पेज.