रेल किराये पर राजनीति

कोरोना वायरस के कारण देश में लगे लॉकडाउन के बाद अब सरकार ने इसमें लोगों को कुछ राहत दी हैं. लेकिन पिछले दिनों देश भर के तमाम हिस्सों में फंसे मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए रेलवे ने श्रमिक ट्रेन चलाईं. जिसके बाद इसका खर्चा उठाने का सवाल सामने आया. जिसके साफ करते हुए रेलवे ने कुछ गाइडलाइन्स जारी की. जिसके तहत कहा गया कि रेल किराये का बोझ राज्य वहन करेंगे और वह ये किराया यात्रियों से वसूल कर के रेलवे को सौंपेंगे.

रेलवे की गाइटलाइंस

इसके बाद राजनीतिक दौर शुरू हो गया. विपक्ष लगातार इस मामले में सरकार पर सवाल उठा रहा है. मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार रेलवे ने ही अपनी गाइडलाइंस में साफ-साफ कहा था कि किराया राज्यों द्वारा यात्रियों से वसूला जाएगा और फिर रेलवे को सौंपा जाएगा. इस सब के बाद सोनिया गांधी ने कहा कि जो मजदूर देश की रीढ़ हैं, इस मुश्किल घड़ी में उन्हें हर मदद दी जानी चाहिए, इसलिए कांग्रेस ने फैसला किया है कि मजदूरों का रेल किराया कांग्रेस वहन करेगी.

सोनिया गांधी ने घेरा

सोनिया गांधी के विरोध के बाद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि ‘भारत सरकार की यह कैसी संवेदनहीनता है कि भूखे-प्यासे प्रवासी मज़दूरों से रेल किराया वसूल रही है! जो भारतीय विदेशों में फंसे थे उन्हें फ्लाइट से मुफ़्त में वापस लाया गया. अगर रेलवे अपने फ़ैसले से नहीं हटती है तो पीएम केयर्स के पैसे का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है?’

बीजेपी ने रखी बात

रेल किराए को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से भी अपनी बात सामने ऱखी गई. मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार बीजेपी ने साफ किया कि रेलवे ने प्रवासी मजदूरों के लिए चलाई जा रही स्पेशल ट्रेन के किराए का 85 फीसदी देने का फैसला किया है और 15 फीसदी राज्यों से वसूला जाएगा, जो मानक किराया होगा.

राहुल का वार

इससे पहले राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सवाल भी उठाया था कि जब गुजरात में एक कार्यक्रम के लिए सरकार 100 करोड़ रुपये ट्रांसपोर्ट और खाने के नाम पर खर्च कर सकती है, रेलवे 151 करोड़ रुपए पीएम कोरोना फंड में दे सकती है तो मजदूरों के मुफ्त रेलयात्रा क्यों नहीं करा सकती?.

अमित मालवीय ने कहा

इस सब के बीच बीजेपी आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने ट्वीट कर कहा कि ‘गृह मंत्रालय की गाइडलाइन में स्पष्ट है कि स्टेशनों पर कोई टिकट नहीं बिकेगा। रेलवे 85 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है तो 15 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार वहन करेगी. प्रवासी मजदूरों को कोई पैसा नहीं देना है. सोनिया गांधी क्यों नहीं कांग्रेस शासित प्रदेशों को खर्च उठाने के लिए कहतीं’.

अमित मालवीय ने एक और ट्वीट में कहा कि ‘कांग्रेस इस बात से दरअसल परेशान है कि कोविड-19 को भारत ने बेहतर तरीके से कैसे हैंडल किया. कांग्रेस और अधिक लोगों को कोरोना का शिकार देखना चाहती है. यही वजह है कि लोगों के आवागमन को प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रही है. ऐसा होने पर संक्रमण और तेज गति से बढ़ेगा, जैसे इटली में हुआ था, क्या सोनिया गांधी यही चाहती हैं’.

शिवराज सिंह चौहान का बयान

इस बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने भी ट्वीट कर के कहा है कि किसी भी मजदूर से ट्रेन में किराया नहीं लिया जाएगा. मजदूरों का लाना का किराया खुद मध्य प्रदेश सरकार वहन करेगी.

अखिलेश का वार

इस सब के बीच पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ट्रेन से वापस घर ले जाए जा रहे गरीब, बेबस मजदूरों से भाजपा सरकार द्वारा पैसे लिए जाने की खबर बेहद शर्मनाक है. आज साफ हो गया है कि पूंजीपतियों का अरबों माफ करने वाली भाजपा अमीरों के साथ है और गरीबों के खिलाफ.

नीतीश कुमार ने कहा

रेल किराए पर हो चल रही राजनीति के बीच बिहार से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मैदान में आए और उन्होंने कहा कि किसी भी मजदूर को रेल किराया देने की जरूरत नहीं है. खबरों के अनुसार नीतीश कुमार की तरफ से कहा गया कि ‘मैं बिहार के लोगों को वापस भेजने के सुझाव पर विचार करने के लिए केंद्र को धन्यवाद देना चाहता हूं. अन्य राज्यों में फंसे बिहार के लोगों को वापस बिहार भेजने के लिए केंद्र को शुक्रिया. किसी को भी टिकट के लिए भुगतान नहीं करना पड़ेगा. उनके लिए यहां क्वारनटीन सेंटर बनाया गया है’. ऐसी रोचक जानकारी के लिए पढ़ें हमारे लेटेस्ट आर्टिकल. अधिक जानकारी के लिए विजिट करें हमारा फेसबुक पेज.