देश में अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बाजार प्रोत्साहन के उपायों की तीसरी किस्त की घोषणा की. तीसरी किस्त के तहत रीयल एस्टेट और निर्यात क्षेत्रों को 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक की मदद देने की योजना बनाई गई है. सरकार की तरफ से यह कदम ऐसे वक्त पर उठाया गया है जब आर्थिय वृद्धि दर 6 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है.

चलिए जानते हैं वित्त मंत्री की तरफ से की गई घोषणाओं के बारे में

बनेगा 20 हजार करोड़ का कोष

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राजधानी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंक के दौरान कहा कि साफ सुथरी अवासीय परियोजनाओं को पूरा कराने में वित्तीय मदद के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का कोष बनाया जाएगा. इसमें करीब 10 हजार करोड़ रुपये सरकार मुहैया कराएगी, इतनी ही राशि अन्य स्रोतों से जुटायी जाएगी.

नियमों में दी जाएगी ढील

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि आवास वित्त कंपनियों के लिए विदेश से वाणिज्यिक ऋण जुटाने के नियमों में ढील देने की भी घोषणा भी की गयी है. भवन निर्माण के लिये ऋण पर ब्याज दर में कमी की भी व्यवस्था की गयी है. इससे विशेष रूप से सरकारी कर्मचारियों को लाभ होगा जो आवास के सबसे बड़े खरीदार हैं.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नई योजना से निर्यातकों को इतनी राहत मिलेगी जो इस समय लागू सभी योजनाओं को मिला कर भी नहीं मिल पाती है. उन्होंने कहा कि इस योजना से सरकारी राजस्व पर 50 हजार करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ने का अनुमान है. वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार मौजूदा योजनाओं के तहत निर्यातकों को 40 से 45 हजार करोड़ रुपये के शुल्कों/करों का रिफंड दे रही है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि वाणिज्य विभाग के तहत एक अंतर-मंत्रालयी समूह निर्यात क्षेत्र को वित्त पोषण की सक्रिय निगरानी करेगा. इसके अलावा निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) निर्यात ऋण बीमा योजना का दायरा बढ़ाएगा. उन्होंने कहा कि निर्यात क्षेत्र के लिए ऋण सुविधा बढ़ाने के उपायों से विशेषकर लघु एवं मझोले कारोबारों के लिए ब्याज सहित निर्यात रिण की लागत कम करने में मदद करेगी. ऐसी रोचक जानकारी के लिए पढ़ें हमारे लेटेस्ट आर्टिकल. अधिक जानकारी के लिए विजिट करें हमारा फेसबुक पेज.

प्रदीप शर्मा