पी चिदंबरम का वार

देश में इन दिनों नागरिकता संशोधन मामले ने तूल पकड़ रखा है. इस मामले के बाद आए सेना प्रमुख बिपिन रावत के बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने नागरिकता कानून के खिलाफ देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन पर विश्वविद्यालय और कॉलेजों के प्रदर्शनकारी छात्रों को लेकर बयान दिया था. जिसके बाद अब कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने सेना प्रमुख को अपने काम से मतलब रखने को कहा.

 ‘क्या यह आर्मी जनरल का काम है’

सेना प्रमुख के बयान के बाद कांग्रेस वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम नए कानून के खिलाफ केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा राजभवन के सामने आयोजित महारैली को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि सेना प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को सरकार का समर्थन करने को कहा गया और यह ‘शर्मनाक’ है. चिदंबरम ने कहा, ‘अब  आर्मी जनरल को बोलने के लिए कहा जा रहा है. क्या यह आर्मी जनरल का काम है?’

‘अपने काम से मतलब रखें’

मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार चिदंबरम ने कहा कि ‘डीजीपी सेना के जनरल को सरकार का समर्थन करने के लिए कहा जा रहा है. यह शर्मनाक है. मैं जनरल रावत से अपील करता हूं आप सेना का नेतृत्व करें और अपने काम से मतलब रखें. नेताओं को जो करना है, वे करेंगे’.

‘यह सेना का काम नहीं है’

मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार चिदंबरम ने कहा कि ‘यह सेना का काम नहीं है कि वह नेताओं को यह बताए कि हमें क्या करना चाहिए. युद्ध कैसा लड़ा जाए, आपको यह बताना हमारा काम नहीं है. आप अपने विचारों के अनुसार युद्ध लड़ें और हम देश की राजनीति को संभालेंगे’.

क्या था बयान

नागरिकता संशोधन कानून पास होने के बाद मचे बवाल के बाद सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने एक इवेंट के दौरान कहा था कि ‘नेता वे नहीं हैं जो गलत दिशा में लोगों का नेतृत्व करते हैं. जैसा कि हम लोग गवाह रहे हैं कि बड़ी संख्या में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्रों ने शहरों और कस्बों में आगजनी और हिंसा करने के लिए जन और भीड़ का नेतृत्व कर रहे हैं. यह नेतृत्व नहीं है’.

आपको बता दें कि इससे पहले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सेना प्रमुख के बयान पर सवाल उठाए थे. दिग्विजय सिंह ने कहा था कि ‘मैं जनरल साहब से सहमत हूं, लेकिन लीडर्स वे भी नहीं होते हैं जो अपने समर्थकों को सांप्रदायिक हिंसा के नरसंहार में शामिल करते हैं. क्या आप मुझसे सहमत हैं जनरल साहब?’ वहीं, ओवैसी ने ट्वीट किया था कि ‘किसी के पद की सीमाओं को जानना ही नेतृत्व है. नागरिक सर्वोच्चता के विचार को समझने तथा अपने अधीन मौजूद संस्थान की अखंडता को सुरक्षित रखने के बारे में है’. ऐसी रोचक जानकारी के लिए पढ़ें हमारे लेटेस्ट आर्टिकल. अधिक जानकारी के लिए विजिट करें हमारा फेसबुक पेज.

प्रदीप शर्मा