आजकल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर नशे की चपेट में आ जाते हैं. शराब सिगरेट और ड्रग्स की लत किसी भी इंसान के लिए बहुत घातक साबित हो सकती है लेकिन अगर इन चीज़ों का इस्तेमाल सीमित मात्रा में किया जाये तो ये शरीर के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकती हैं।  आज बात करेंगे भाँग के बारे में और जानेंगे की भाँग में ऐसी कौन खासियत होती है जो लोगों को इसकी लत लगा देती है.

कैसे इस्तेमाल किया जाता है ये सस्ता नशा –

भाँग का सेवन करने के दो तरीके हैं. इसका शौक रखने वाले लोग अक्सर इसे जलाकर सिगरेट या बीड़ी की तरह पीते हैं. कुछ लोग इसे खाकर या पीकर नशा करते हैं. अगर इसे जलाकर पिया जाए तो इसका असर कुछ सेकंड में ही होने लगता है और अगर इसे आप पीते हैं या खाते हैं तो इसका नशा आने में आधे से एक घंटे का टाइम लग सकता है.

क्या होता है भाँग का असर –

भाँग का इस्तेमाल करने के बाद इंसान के अंदर हैप्पी हार्मोन जिसे डोपामीन कहते है का स्तर बढ़ जाता है. ऐसा इसलिए होता हैं क्योंकि भाँग में टीएचसी यानि टेट्राहाइड्रोकार्बनबिनोल पाया जाता है. ये डोपामीन को बढ़ाने में अहम् भूमिका निभाता है जिससे इसे लेने के बाद इंसान बहुत ख़ुश महसूस करता है. माना जाता है कि यह ख़ुशी किसी सम्मान को पाने से भी ज्यादा होती है. इस ख़ुशी को बार बार पाने के चक्कर में इंसान इसका आदी बन जाता है.

अधिक मात्रा में लेने से क्या होता है ?

अगर इसे बहुत ज़्यादा मात्रा में लिया जाता है तो इसका सीधा असर इंसान के दिमाग पर पड़ता है. थोड़े समय के लिए दिमाग हाइपर एक्टिव हो जाता है और वो आस पास की चीज़ों को महसूस नहीं कर पाता है. लेकिन अगर लम्बे समय तक इसका सेवन किया जाए तो दिमाग़ ठीक से काम करना बंद भी कर सकता है. इंसान डिप्रेशन और चिंता महसूस करने लगता है. ब्लड प्रेशर बढ़ने से हार्ट अटैक के चांस बन जाते हैं और सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है. भाँग के सेवन से महिलाओं के अंदर गर्भधारण करने की क्षमता कम हो जाती है.

भाँग का इस्तेमाल करता है मेडिकल साइंस –

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अगर इसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाए तो भाँग एक दवा की तरह भी काम करता है. कई मनोवैज्ञानिक ये मानते हैं क़ी भाँग का इस्तेमाल एकाग्रता बढ़ाने में किया जा सकता है. यह सीखने और याद करने की क्षमता में भी बहुत इज़ाफ़ा करता है. अगर कोई व्यक्ति कान के दर्द से परेशान है तो भाँग के पत्ते का रस डालकर वो आराम पा सकता है. इसका सीमित सेवन बहुमूत्र की समस्या का भी समाधान कर सकता है. आयुर्वेद के अनुसार खांसी होने पर भाँग और पीपल के पत्ते को पीसकर सोंठ और काली मिर्च के साथ लेने से खांसी चली जाती है.

भाँग और गाँजे में नहीं है कोई बड़ा अंतर –

दरअसल भाँग और गांजा एक ही प्रजाति के पौधे हैं. भाँग मादा और गाँजा इस पौधे की नर प्रजाति है. भाँग के सिर्फ पत्ते इस्तेमाल किये जाते हैं जबकि गांजा फूल, पत्ती और जड़ को मिलाकर बनाया जाता है. गाँजा , भाँग  से कहीं ज्यादा  नुकसानदायक होता है इसीलिए ये भारत में बैन है जबकि भाँग पर कोई रोक सरकार ने नहीं लगायी है.