इन दिनों भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी का माहौल बना हुआ है. ऐसे में पाकिस्तानी सीमा के पास पठानकोट एयरबेस में अधुनिक तकनीक वाले आठ अपाचे हेलिकॉप्टर को तैनात किया गया है. भारत को यह हेलिकॉप्टर अमेरिका से मिले हैं. जिसकी तैनाती से पहले वॉटर कैनन से उन्हें सलामी दी गई. पठानकोट एयरबेस पर अपाचे हेलिकॉप्टर्स की तैनाती से भारतीय एयरफोर्स की ताकत और भी ज्यादा बढ़ जाएगी. तैनाती से पहले एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ और वेस्टर्न एयर कमांडर एयर मार्शल आर नांबियार ने अपाचे हेलिकॉप्टर्स की पूजा की.

2015 में हुआ अनुबंध

साल 2015, सितंबर महीने में अमेरिकी सरकार और बोइंग लिमिटेड के साथ वायुसेना ने 22 अपाचे हेलिकॉप्टर्स का अनुबंध किया था. बोइंग ने 27 जुलाई को 22 हेलिकॉप्टर्स में से पहले चार हेलिकॉप्टर्स वायुसेना को सौंप दिए थे. जिसके लगभग 4 साल के बाद हिंडन एयर बेस पर भारतीय वायुसेना का अपाचे हेलिकॉप्टर्स के पहले बैच की डिलीवरी की गई थी. वही रक्षा मंत्रालय की तरफ से साल 2017 में सेना के लिए 4,168 करोड़ रुपए की लागत से बने बोइंग से 6 अपाचे हेलिकॉप्टर्स की खरीद को मंजूरी दी थी.

समय से पहले हुई डिलीवरी

भारतीय वायुसेना साल 2020 तक 22 अपाचे हेलिकॉप्टर के बेड़े को संचालित करेगी. आपको बता दें कि वायुसेना के लिए AH-64E अपाचे ने जुलाई 2018 में पहली सफल उड़ान भरी थी. वायुसेना के पहले बैच ने साल 2018 में अमेरिका में अपाचे को उड़ाने के लिए अपना प्रशिक्षण शुरू किया था. मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार हेलिकॉप्टर्स की डिलीवरी तय सीमा से पहले हुई है.

बढ़ी वायुसेना की ताकत

AH-64E अपाचे दुनिया की सबसे अच्छी बहुभूमिका लड़ाकू हेलिकॉप्टर्स में से एक हैं. इन हेलिकॉप्टर्स का इस्तेमाल अमेरिकी सेना द्वारा भी किया जाता है. ऐसे में अब भारतीय वायुसेना की ताकत और भी ज्यादा बढ़ गई है. जानकारी है कि भारतीय वायुसेना पठानकोट और चीन बॉर्डर की सुरक्षा के लिए असम के जोरहट में इन हेलिकॉप्टर्स को तैनात करेगी. ऐसी रोचक जानकारी के लिए पढ़ें हमारे लेटेस्ट आर्टिकल. अधिक जानकारी के लिए विजिट करें हमारा फेसबुक पेज.

प्रदीप शर्मा