मशहूर सूफी गायक कैलाश खेर 7 जुलाई को अपना 46 वां जन्मदिन मना रहे हैं. कैलाश खेर का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुआ था. कैलाश ने सिर्फ 13 साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था. संगीत के प्रति उनकी लगन बचपन से ही उनके साथ थी. संघर्ष के दौर में वह बच्चों को संगीत की ट्यूशन देते थे और अपने आप को निखारते थे. एक दिन कैलाश खेर ने वह मुकाम हासिल कर ही लिया जो कभी उनका ख्वाब हुआ करता था.

स्ट्रगल से भरी थी जिंदगी

अपनी जिंदगी में कैलाश खेर ने काफी स्ट्रगल किया है. साल 1999 में जब हर तरफ उन्हें निराशा हाथ लग रही थी तब उनके एक दोस्त के साथ वह बिजनेस करने लग गए थे. लेकिन व्यापार में भी उनका सिक्का नहीं चला और काफी घाटा हुआ जिसका असर यह रहा कि वह डिप्रेशन में चले गए.

जब सुसाइड का लिया था फैसला

बताया जाता है कि डिप्रेशन उनके दिमाग पर इस कदर हावी हो गया था कि उन्होंने सुसाइड तक करने का फैसला ले लिया था. साल 2001 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद के कैलाश मुंबई आए. खाली जेब लेकर मुंबई आए कैलाश ने अपने संगीत के जुनून को कम नहीं होने दिया. उसके बाद 1 दिन की उनकी मुलाकात संगीतकार राम संपत से हुई. जिसके बाद उनको कुछ रेडियो जिंगल गाने का मौका मिला. कहते हैं ना प्रतिभा के पैर होते हैं और वह अपनी मंजिल तलाश लेती है. कुछ ऐसा ही कैलाश के साथ हुआ जिसके बाद अब वह किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं.

कैलाश के मिले हैं कई अवार्ड

कैलाश को अपनी गायकी के लिए पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित भी किया गया है. वह दो बार  फिल्म फेयर बेस्ट सिंगर का अवॉर्ड भी जीत चुके हैं. उन्होंने हिंदी में 500 से ज्यादा गाने गाए हैं. जिसके साथ उन्होंने तमाम क्षेत्रीय भाषाओं में भी अपने सुर का जलवा बिखेरा है. ‘तेरी दीवानी’ कैलाश के सबसे फेमस गानों में से एक है. उनका ‘कैलाशा’ नाम से अपना एक बैंड भी है जोकि नेशनल और इंटरनेशनल शो करता है. उनके कई गाने एवरग्रीन है जो आज भी उनके फैंस गुनगुनाते रहते हैं. जैसे ‘अल्लाह के बंदे’ और ‘वैसे भी होता है’ यह सब गाने उनके फैंस की जुबान पर रहते हैं. फिल्म बाहुबली 2 मूवी में कैलाश ने अपने सुर का जलवा बिखेरा है. ऐसी रोचक जानकारी के लिए पढ़ें हमारे लेटेस्ट आर्टिकल. अधिक जानकारी के लिए विजिट करें हमारा फेसबुक पेज.