पूरा देश जिस घटना पर हैरान है वो है रोहित शेखर का क़त्ल। मामला हाई प्रोफाइल भले ही हो लेकिन इस कहानी में बहुत से ऐसे पहलु हैं जो राजनीति की चकाचौंध में किसी आदमी को दिखाई नहीं दिए. यहाँ तक कि शेखर का मर्डर करने वाली उसकी पत्नी अपूर्वा भी ये नहीं जानती थी कि जिस घर को वो कुबेर का राज्य समझ रही थी वो दरअसल उलझे हुए रिश्तों का एक खंडहर था. एक ऐसा खंडहर जहाँ पर एक नाजायज़ औलाद यानि रोहित अपने बाप ( पूर्व राजनेता एनडी तिवारी ) से लम्बे समय तक बेटे होने का हक़ माँगता रहा है.  एक ऐसा खंडहर जहाँ रोहित की माँ उज्ज्वला ने कई कई दिन राजनीति में व्यस्त अपने पति एनडी तिवारी के इंतज़ार में काटे हैं. पूरी कहानी अब तक आँसू भरी जरुर थी लेकिन उसमें लहू के निशान नहीं थे. लेकिन अपने स्वार्थ में डूबी अपूर्वा को कहानी का ये अधूरापन रास नहीं आया और उन्होंने रोहित की हत्या के साथ कहानी का अंत कर दिया।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाली अपूर्वा 2017 में एक मैट्रीमोनियल साइट के जरिये रोहित से मिली थीं. बाद में दोनों की गहरी दोस्ती हो गयी और बात शादी तक जा पहुँची। अपूर्वा को कहीं ना कहीं ये लगता था कि रोहित तिवारी के पिता एनडी तिवारी तीन बार उत्तर प्रदेश और एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं इसके अलावा आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी रहे हैं। वहीँ दूसरी तरफ रोहित के नाना भी चार बार कैबिनेट मंत्री रहे हैं तो रोहित के नाम अकूत संपत्ति है. लेकिन शादी के बाद अपूर्वा को पता लगा कि ऐसा कुछ नहीं हैं. रोहित की संपत्ति बेहद कम है और उसमें से भी चालीस प्रतिशत संपत्ति उसके दूर के भाई के नाम है.

ये पहली वजह थी जिसकी वजह से अपूर्वा इस रिश्ते से खुश नहीं थी. दूसरी वजह थी रोहित की बीमारी। रोहित दिल की बीमारी से जूझ रहे थे और ऐसी हालत में वो शराब का लगातार सेवन कर रहे थे.  तीसरा कारण था वो शक जो अपूर्वा के मन में घर कर गया था कि रोहित के अपनी दूर की भाभी के साथ अवैध सम्बन्ध हैं. इन तीन कारणों की वजह से अपूर्वा डिप्रेशन में भी रहती थी और फिर आयी 15-16 मई की महनूस रात जिस दिन हमेशा की तरह दोनों में झगड़ा हुआ. बात इस कदर बढ़ गयी कि अपूर्वा ने गुस्से में रोहित गला दबा दिया। अब रोहित की माँ उज्ज्वला का कहना है कि अपूर्वा का पूरा परिवार रोहित की संपत्ति की चाह रखता है. अपूर्वा अब पुलिस की गिरफ्त में हैं और उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. देखते हैं कानून इस घटना पर क्या फैसला सुनाता है !