भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान ने चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग ऐन वक्त पर टाल दी. यह मिशन सोमवार रात 2:51 पर लॉन्च होना था लेकिन इसे कुछ देर पहले लॉन्चिंग व्हीकल सिस्टम में तकनीकी खराबी का पता चला जिसके बाद इसरो ने लॉन्चिंग आगे बढ़ाने का ऐलान कर दिया. लॉन्चिंग से ठीक 56 मिनट पहले तकनीकी खराबी का पता चला जिसके बाद इसरो की तरफ से कहा गया कि जल्द ही नई तारीख तय होगी.

मिशन देखने के लिए श्रीहरिकोटा मौजूद थे राष्ट्रपति

चंद्रयान मिशन को देखने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी देर रात तक श्रीहरिकोटा में मौजूद थे. लेकिन 11 साल की मेहनत और 960 करोड रुपए का खर्च के बाद मिशन चंद्रयान-2 पर कुछ दिनों के लिए ब्रेक लग गया.

चंद्रयान-2 श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के लिए उड़ान भरने वाला था. भारत ने 3,84,400 किलोमीटर की यात्रा के लिए चंद्रयान-2 को तैयार किया है. हालांकि जल्द ही कमी को दूर किया जाएगा और मिशन को लांच किया जाएगा. मिशन में रुकावट आने के बाद इसरो के वैज्ञानिकों का ध्यान अब इसी बात पर लगा हुआ है कि लॉन्चिंग से पहले यह तकनीकी कमी कहां से आ गई.

हो सकती थी बड़ी घटना

वहीं विशेषज्ञों की मानें तो लॉन्चिंग से पहले तकनीकी खामी को ढूंढ लेना काफी बड़ी बात है इसरो के वैज्ञानिकों ने अंतिम क्षणों में यह तकनीकी कमी को खोजा जो कि एक बहुत बड़ा कदम है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रॉकेट किसी कमी के साथ लॉन्च होता तो काफी बड़ा हादसा हो सकता था जिसके बाद अब इसरो के वैज्ञानिक इस कमी को पूरा कर रहे हैं.

क्या है चंद्रयान 2 मिशन

नई तारीख तय होने पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन सेंटर से चंद्रयान-2 को भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क 3 रॉकेट लॉन्च किया जाएगा. दरअसल चंद्रयान-2 वास्तव में चंद्रयान-1 मिशन का ही नया भाग है. इसमें आर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल है. चंद्रयान-1 में सिर्फ ऑर्बिटल था जो चंद्रमा की कक्षा में घूमता था. चंद्रयान 2 के जरिए भारत पहली बार चांद की सतह पर लेंडर उतारेगा और लैंडिंग चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर होगी. चंद्रयान 2 के सक्सेस होने के बाद भारत चांद के दक्षिणी ध्रूव पर यान उतारने वाला पहला देश बन जाएगा.  ऐसी रोचक जानकारी के लिए पढ़ें हमारे लेटेस्ट आर्टिकल. अधिक जानकारी के लिए विजिट करें हमारा फेसबुक पेज.

प्रदीप शर्मा