करण जौहर को अक्सर इस बात पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है कि वह फिल्म इंडस्ट्री के लोगों या अमीर लोगों को प्राथमिकता देते हैं. लेकिन करण का कहना है कि वह अपनी बनाई हुई फिल्मों के लिए माफी नहीं मांगेंगे. लेकिन वह बदलते वक्त के साथ सिनेमा बनाने की अपनी पद्धति को बदलने के लिए तैयार हैं. यह सब उन्होंने मुंबई में लेखिका शुनाली खुल्लर श्रॉफ की किताब ‘लव इन द टाइम ऑफ एफफ्लूएंजा’ की लॉन्चिंग के मौके पर कहा.

करण- किरदारों की लोग तमन्ना करते हैं

मीडिया से बात करते हुए करण जौहर ने कहा कि ‘मैंने उस किस्म की फिल्में इसलिए बनाई है क्योंकि मैं एक निश्चित माहौल में बड़ा हुआ हूं और वहां एक ऐसी तमन्ना भी थी जो मेरे सोचने के तरीके के साथ जुड़ी हुई थी. मैं हमेशा सोचता था कि सिनेमा असल जीवन से कहीं ज्यादा है और इसलिए मैंने ऐसे किरदार बनाए जिसकी लोग तमन्ना करते हैं’.

करण- सिनेमा का रचनाक्रम बदला

करण जौहर ने आगे कहा कि ‘लेकिन कहीं ना कहीं आगे चलकर सिनेमा का रचना क्रमबदल गया और मुझे उसे स्वीकार करना होगा. निश्चित करना होगा कि मेरे किरदार और भी ज्यादा जमीन से जुड़े हुए और वास्तविक हो जिससे वह अब और ज्यादा चमक धमक वाले नहीं लगे’.

करण- मैं माफी नहीं मांगूगा

मीडिया से बात करते हुए फिल्मकार करण जौहर ने कहा कि ‘मुझ पर एफ्लूएंजा का आरोप है. लेकिन यह कहते हुए मैं उन फिल्मों के लिए माफी नहीं मांगूंगा जिन्हें मैंने बनाया है. हालांकि मुझे लगता है कि भविष्य में मुझे इसमें बदलाव लाना होगा’.

क्या है एफफ्लूएंजा ?

आपको बता दें कि एफ्लूएंजा का मतलब अमीरों की समस्या से होता है. अधिकतर ऐसा माना जाता है कि अमीरों के पास वास्तव में कोई परेशानियां नहीं होती. जिंदगी को जीने में उन्हें अकेलापन जीवन से ऊब जाना या असंतुष्ट हो जाने जैसी समस्याओं का ही सामना करना पड़ता है. इसमें खुद को खुश कर रखने के लिए वे पैसो के पीछे भागते हैं. ऐसी रोचक जानकारी के लिए पढ़ें हमारे लेटेस्ट आर्टिकल. अधिक जानकारी के लिए विजिट करें हमारा फेसबुक पेज.

प्रदीप शर्मा