राज्यसभा में प्रश्नकार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि अभी असम में जो एनआरसी है वह असम समझौते का हिस्सा है. अमित शाह ने बताया कि ‘सभी ने सदन में राष्ट्रपति का भाषण सुना होगा, जिस घोषणापत्र के आधार पर हम चुनकार आए हैं उसमें भी यह बात कही गई है. देश की इंच इंच जमीन पर जितने भी अवैध प्रवासी रहते हैं या घुसपैठिए रहते हैं, इनकी हम पहचान करने वाले हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हम इनको डिपोर्ट करेंगे.’

जब शाह ने किया था रैली को संबोधित

क्रेंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अनुसार अभी जो असम में एनआरसी लागू है वह असम समझौते का हिस्सा है. बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी नेता अमित शाह ने असम के लखीमपुर में चुनावी रैली को संबोधित किया था. अपने संबोधन के दौरान शाह ने नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन बिल पर कहा था कि हम असम को देश का दुसरा कश्मीर नहीं बनने देंगे और मोदी सरकार एनआरसी इसलिए ही लाई है.

फाइनल सूची का प्रकाशन 31 जुलाई को

शाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश अनुसार असम में एनआरसी को 31 जुलाई 2019 तक प्रकाशित किया जाना है. प्रश्नकार के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की एनआरसी को लागू करने की मंशा बिल्कुल साफ है. शाह ने कहा कि राष्ट्रपति और सरकार के पास 25 लाख से अधिक ऐसे आवेदन मिले हैं जिसमें यह बात कही गई है कि कुछ भारतीयों को भारत का नागरिक ही नहीं माना गया है. उन्होंने कहा कि एनआरसी में ऐसे नागरिकों को भी भारतीय माना गया है जोकि बाहर से आए हैं. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यह अनुरोध किया है कि इन आवेदनों पर विचार विमर्श करने के लिए थोड़ा वक्त दिया जाए.  

वही पीएम मोदी ने भी एनआरसी के मुद्दे पर राज्यसभा में कहा था कि कांग्रेस की राजीव गांधी सरकार ने एनआरसी को स्वीकार किया था लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में दखल देना पड़ा था.   नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स 1951 में तैयार हुआ था. इसके अनुसार 24 मार्च 1971 की आधी रात में जिन लोगों ने राज्य में प्रवेश किया है उन सभी को भारतीय नागरिक का दर्जा प्राप्त है. वही एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया को साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में शुरु किया गया था. ऐसी रोचक जानकारी के लिए पढ़ें हमारे लेटेस्ट आर्टिकल. अधिक जानकारी के लिए विजिट करें हमारा फेसबुक पेज.

प्रदीप शर्मा