मणिपुर के एक ग़रीब परिवार में जन्मी वो लड़की जिसने सिर्फ पूरे भारत को ही नहीं गर्व से गद गद कर दिया बल्कि पूरे विश्व में अपना लोहा एक बार फिर से मनवा लिया. भारतीय बॉक्सिंग की सबसे बड़ी और ‌अपनी शानदार उपब्धियों के चलते मैग्निफ़िसेंट मैरी के नाम से जानी जानेवाली एमसी मैरी कॉम लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं.

बाक्सिंग के लिए मैरी ने छोड़ दी थी पढ़ाई

मैरी कॉम छह बार की वर्ल्ड चैम्पियन और ओलंपिक्स पदक विजेता हैं जो मणिपुर के साथ साथ पूरे भारत की शान है. मैरी बॉक्सिंग के लिए इतनी दिवानी थी की उन्होंने अपनी स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी थी. हालांकि उन्होंने आगे चलकर डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए अपना ग्रैजुएशन कंप्लीट किया. मैरी कॉम जैसी सशक्त महिलाएं विलपावर की एक बड़ी मिसाल पेश करती हैं.

मैरीकॉम 6 बार बन चुकी हैं वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन

इंडियन वुमन बॉक्सर एमसी मैरी कॉम ने दिल्ली के केडी जाधव इंडोर स्टेडियम में गोल्ड मैडल अपने नाम किया था. उन्होंने यूक्रेन की हना ओखोटा को 5-0 से हराया था. वहीं मैरी कॉम बॉक्सिंग वर्ल्ड चैम्पियनशिप में कुल 8वां मेडल भी अपने नाम कर चुकी हैं. इसके साथ ही मैरीकॉम आयरलैंड की कैटी टेलर को पीछे छोड़ते हुए सबसे ज्यादा बार वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतने वाली दुनिया की इकलौती महिला बॉक्सर बन चुकी हैं.

बचपन में ही ली बाक्सिंग की ट्रेनिंग

वैसे तो आप मैरी कॉम की लाइफ पर बनी फिल्म मैरी कॉम को देखने के बाद उनकी लाइफ के स्ट्रगल, सक्सेस, औऱ लव स्टोरी से कुछ हद तक परिचित होंगे ही. लेकिन क्या आप जानते है कि बचपन में मैरी कॉम के फादर के पास स्कूल की फीस के लिए भी पैसे नहीं होते थे, जिसकी वजह से मैरी कॉम को कई बार क्लास के बाहर खड़ा होना पड़ता था. साल 2000 में बाक्सिंग के गोल्ड मेडलिस्ट डिंगको सिंह को देखकर मैरी कॉम का इंटरेस्ट बॉक्सिंग की तरफ बढ़ने लगा. औऱ मैरी ने क्लास 7 में अपनी पढ़ाई छोड़ दी. एम.नरजित से मैरी काम ने बाक्सिंग की ट्रेनिंग लेनी शुरु की जो मणिपुर के बॉक्सिंग कोच थे.

मैरी को रिंग में देख लोग रह गए थे हैरान

जब पहली बार मैरी रिंग में स्टेट स्तरीय कॉम्पटीशन के लिए उतरी तो उनकी बाक्सिंग देखकर सब हैरान रह गए. क्योंकि लोगों को लगता था कि उनकी जैसी दुबली पतली लड़की बॉक्सर कैसे बन सकती है. उनके मुक्कों में इतना दम था कि कोई उनके सामने टिक नहीं पाया था. उन्होंने न केवल वंहा गोल्ड जीता बल्कि वो कॉम्टीशन की बेस्ट बॉक्सर भी चुनी गई. ये उनका जज्बा ही था कि जब साल 2001 में पहली नेशनल वूमन बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए उन्हे ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं मिला तो वो ट्रेन के टॉयलेट के पास बैठकर ही चली गई औऱ उसके बाद उन्होने गोल्ड मेडल भी जीत लिया.

2005 में मैरी ने शादी कर ली

साल 2002, 2005, 2006, 2008, और 2010 में लगातार वो गोल्ड मेडल जीतती रहीं. मैरी कॉम ने साल 2005 में ओनलर
कॉम से शादी की औऱ साल 2007 में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया लेकिन उसके बावजूद उनका
बॉक्सिंग को लेकर प्यार कम नहीं हुआ.
मां बनने के बाद भी उन्होंने विश्व खिताब हासिल किया और 2008 में उन्हें मैग्नीफिशेंट
मैरीकॉम की उपाधि से भी नवाजा गया. उनकी फिटनेस देखकर कोई नहीं कह सकता कि आज वो तीन
बच्चों की मां हैं. सुपर मॉम के नाम से मैरी कॉम को जाना जाता है औऱ उनका एक ही मंत्र
है कि अगर वो फिट रहेंगी तो गोल्ड मैडल उनके कब्जे में रहेंगे.